पदेवों का प्रिय माह – पुरुषोत्तम माह

पदेवों का प्रिय माह – पुरुषोत्तम माह

images (6)

किसी वर्ष में माह के अधिकता अथवा कमी होने की स्थिति चन्द्र मास में ही होती है। परन्तु यह माह की अधिकता अथवा कमी का निर्णय सूर्य संक्रांति से होता है। सामान्यतः प्रत्येक माह में संक्रांति अर्थात सूर्य का राषि परिवर्तन एक बार अवष्य रहने से चन्द्र माह की प्रक्रिया सहज चलती रहती है। जब माह में दो सूर्य संक्रांतियों का समावेष हो तो क्षय मास आता है। वहीं जिस माह में सूर्य संक्रांति का आभाव होता है उसे अधिक मास कहते हैं।

एक वर्ष की गणना के अनुसार 32 महीने 16 दिवस 1 घंटा 36 मिनट के अंतर से अधिक मास का चक्र प्रारंभ होता है। एक सौर वर्ष 365 इिन 6 घंटे 11 सेंकड के मान से बना है। इसके विपरीत चन्द्र वर्ष 354 दिन 9 घंटे का होता है। सौर एवं चन्द्र वर्ष के मध्य इस दूरी को अधिक मास से पाटा गया है। अधिक मास भगवान विष्णु को प्रिय होने के कारण इसको पुरुषौत्तम का नाम भी दिया गया है।

असंक्रांति मासोऽधिमासः स्फुटः स्यात्

द्विसंक्रांति मासः क्षयाख्यः कदाचित्॥

AdhikMaas download app short

Click here for adhik mass pooja

Click here for all about pooja and yagya

 

Created: Sunday, May 24 2015
Author: Lokesh Jagirdar

Free Horoscopes 2017

Aries Taurus Gemini Cancer Leo Virgo Libra Scorpio Sagittarius Capricorn Aquarius Pisces